• order or writ | |
आदेश: behest instruction word testament prescript | |
या: OR either whether | |
आदेश या रिट in English
[ adesh ya rit ] sound:
आदेश या रिट sentence in Hindi
Examples
- The Supreme Court has been given the power to issue directions , orders or writs in the nature of habeas corpus , mandamus , prohibition , quo-warranto and certio-rari , whichever may be appropriate , for the enforcement of any of the rights conferred .
उच्चतम न्यायालय को यह शक्ति दी गई है कि वह प्रदत्त अधिकारों में से किसी को प्रवर्तित कराने के लिए , ऐसे निदेश या आदेश या रिट जिनके अंतर्गत बंदी प्रत्यक्षीकरण , परमादेश , प्रतिषेध , अधिकार-पृच्छा और उत्प्रेषण रिट हैं , जो भी समुचित हो , जारी कर सके . - Article 226 lays down that every High Court shall have power throughout the territory under its jurisdiction to issue to any person or authority directions , orders or writs including writs of habeas corpus , prohibition , quo warran-to and certiorari or any of them for the enforcement of the fundamental rights or for any other purpose .
अनुच्छेद 226 के अनुसार प्रत्येक उच्च न्यायालय अपनी अधिकारिता वाले समूचे राज्य क्षेत्र में मूल अधिकारों को लागू कराने के लिए या किसी अन्य प्रयोजन के लिए किसी व्यक्ति या प्राधिकारी को ऐसे निदेश , आदेश या रिट जैसे , बंदी प्रत्यक्षीकरण1 , परमादेश2 , प्रतिषेध3 , अधिकार-पृच्छा4 और उत्प्रेषण रिट5 या उनमें से किसी को जारी कर सकेगा . - Article 226 lays down that every High Court shall have power throughout the territory under its jurisdiction to issue to any person or authority directions , orders or writs including writs of habeas corpus , prohibition , quo warran-to and certiorari or any of them for the enforcement of the fundamental rights or for any other purpose .
अनुच्छेद 226 के अनुसार प्रत्येक उच्च न्यायालय अपनी अधिकारिता वाले समूचे राज्य क्षेत्र में मूल अधिकारों को लागू कराने के लिए या किसी अन्य प्रयोजन के लिए किसी व्यक्ति या प्राधिकारी को ऐसे निदेश , आदेश या रिट जैसे , बंदी प्रत्यक्षीकरण1 , परमादेश2 , प्रतिषेध3 , अधिकार-पृच्छा4 और उत्प्रेषण रिट5 या उनमें से किसी को जारी कर सकेगा . - Justice P N Bhagwati has also ob- served that : it may now be taken as well established that where a legal wrong or legal injury is caused to a person or to a determinate class of persons by reason or violation of any person 's constitutional or legal right or any burden is imposed in contravention of any constitutional or legal provision or without author-ity of law or any such legal wrong or legal injury or illegal burden is threatened and such person or determinate class of persons is by reason of poverty , helplessness or disability or socially or economically disadvantaged position unable to approach the court for relief , any member of the public can maintain an application for an appropriate direction , order or writ in the High Court under Article 226 and in case of breach of any fundamental right of such person or determinate class of persons , in this Court under Article 32 of the Constitution seeking judicial redress for the legal wrong or injury caused to such person or determinate class of persons .
नऋ-ऊण्श्छ्ष्-यायमूर्ति पी.एन . भगवती ने यह भी कहा है कि ः अब इस बात को सुसऋ-ऊण्श्छ्ष्-थापित माना जा सकता है कि जहां किसी वऋ-ऊण्श्छ्ष्-यि> अथवा एक निशऋ-ऊण्श्छ्ष्-चित वऋ-ऊण्श्छ्ष्-यि>-समूह को उसके संवैधानिक या कानूनी अधिकार के उलऋ-ऊण्श्छ्ष्-लंघन के कारण किसी विधिक अनऋ-ऊण्श्छ्ष्-याय अथवा विधिक क्षति का शिकार होना पडऋआ है या किसी संवैधानिक अथवा कानूनी उपबंध के उल्लंघन से अथवा कानूनी प्राधिकार के बिना उस पर कोऋ भार आरोपित किया गया है या ऐसे विधिक अनऋ-ऊण्श्छ्ष्-याय या विधिक क्षति या अवैध भार की कोऋ आशंका है और ऐसा वऋ-ऊण्श्छ्ष्-यि> या निशऋ-ऊण्श्छ्ष्-चित वऋ-ऊण्श्छ्ष्-यि>-समूह निर्धनता , असहायावसऋ-ऊण्श्छ्ष्-था , निर्योगऋ-ऊण्श्छ्ष्-यता या सामाऋक अथवा आर्थिक दृष्टि से अपनी अलाभकर ढस्थिति के कारण राहत के लिए नऋ-ऊण्श्छ्ष्-यायालय तक पहुंचने में असमर्थ है तो जनता का कोऋ सदसऋ-ऊण्श्छ्ष्-य अनुचऋ-ऊण्श्छ्ष्-छेद 226 के अधीन उचऋ-ऊण्श्छ्ष्-च नऋ-ऊण्श्छ्ष्-यायालय में उचित निदेश , आदेश या रिट जारी करने के लिए आवेदन प्रसऋ-ऊण्श्छ्ष्-तुत कर सकता है और यदि किसी वऋ-ऊण्श्छ्ष्-यि> या निशऋ-ऊण्श्छ्ष्-चित वऋ-ऊण्श्छ्ष्-यि>-समूह के किसी मूल अधिकार का भंग हुआ है तो उसके साथ हुए विधिक अनऋ-ऊण्श्छ्ष्-याय या विधिक क्षति का नऋ-ऊण्श्छ्ष्-यायिक उपचार पाने के लिए संविधान के अनुचऋ-ऊण्श्छ्ष्-छेद 32 के अधीन उचऋ-ऊण्श्छ्ष्-चतम नऋ-ऊण्श्छ्ष्-यायालय में आवेदन किया जा सकता है . - Justice P N Bhagwati has also ob- served that : it may now be taken as well established that where a legal wrong or legal injury is caused to a person or to a determinate class of persons by reason or violation of any person 's constitutional or legal right or any burden is imposed in contravention of any constitutional or legal provision or without author-ity of law or any such legal wrong or legal injury or illegal burden is threatened and such person or determinate class of persons is by reason of poverty , helplessness or disability or socially or economically disadvantaged position unable to approach the court for relief , any member of the public can maintain an application for an appropriate direction , order or writ in the High Court under Article 226 and in case of breach of any fundamental right of such person or determinate class of persons , in this Court under Article 32 of the Constitution seeking judicial redress for the legal wrong or injury caused to such person or determinate class of persons .
नऋ-ऊण्श्छ्ष्-यायमूर्ति पी.एन . भगवती ने यह भी कहा है कि ः अब इस बात को सुसऋ-ऊण्श्छ्ष्-थापित माना जा सकता है कि जहां किसी वऋ-ऊण्श्छ्ष्-यि> अथवा एक निशऋ-ऊण्श्छ्ष्-चित वऋ-ऊण्श्छ्ष्-यि>-समूह को उसके संवैधानिक या कानूनी अधिकार के उलऋ-ऊण्श्छ्ष्-लंघन के कारण किसी विधिक अनऋ-ऊण्श्छ्ष्-याय अथवा विधिक क्षति का शिकार होना पडऋआ है या किसी संवैधानिक अथवा कानूनी उपबंध के उल्लंघन से अथवा कानूनी प्राधिकार के बिना उस पर कोऋ भार आरोपित किया गया है या ऐसे विधिक अनऋ-ऊण्श्छ्ष्-याय या विधिक क्षति या अवैध भार की कोऋ आशंका है और ऐसा वऋ-ऊण्श्छ्ष्-यि> या निशऋ-ऊण्श्छ्ष्-चित वऋ-ऊण्श्छ्ष्-यि>-समूह निर्धनता , असहायावसऋ-ऊण्श्छ्ष्-था , निर्योगऋ-ऊण्श्छ्ष्-यता या सामाऋक अथवा आर्थिक दृष्टि से अपनी अलाभकर ढस्थिति के कारण राहत के लिए नऋ-ऊण्श्छ्ष्-यायालय तक पहुंचने में असमर्थ है तो जनता का कोऋ सदसऋ-ऊण्श्छ्ष्-य अनुचऋ-ऊण्श्छ्ष्-छेद 226 के अधीन उचऋ-ऊण्श्छ्ष्-च नऋ-ऊण्श्छ्ष्-यायालय में उचित निदेश , आदेश या रिट जारी करने के लिए आवेदन प्रसऋ-ऊण्श्छ्ष्-तुत कर सकता है और यदि किसी वऋ-ऊण्श्छ्ष्-यि> या निशऋ-ऊण्श्छ्ष्-चित वऋ-ऊण्श्छ्ष्-यि>-समूह के किसी मूल अधिकार का भंग हुआ है तो उसके साथ हुए विधिक अनऋ-ऊण्श्छ्ष्-याय या विधिक क्षति का नऋ-ऊण्श्छ्ष्-यायिक उपचार पाने के लिए संविधान के अनुचऋ-ऊण्श्छ्ष्-छेद 32 के अधीन उचऋ-ऊण्श्छ्ष्-चतम नऋ-ऊण्श्छ्ष्-यायालय में आवेदन किया जा सकता है .